यह कैसी तलाक.....


Writer:- संजीव शेखर जी Total page:-   2
Type:- कविता Page no.:- 1
Date:- 8/22/2017    
Description:- प्रारंभ से हीं तलाक के अधिकतर फैसले समाज की कुरीतियों, अंधविश्वासों, रुढ़ी परंपरावादी सोच आदि की उपज रहा है आज भी अधिक्तर फैसले इसी से प्रभावित हो कर लिए जा रहे हैं। वर्तमान में इसके प्रयोग से हमारे समाज की धूरी( महिलाऔ) में असंतोष, क्षुब्दा व घुटन जैसी स्थिति पैदा हो रही है, दूसरी तरफ दूसरा पक्ष(पुरुष) इसे अपना मौलिक व धार्मिक अधिकार बताते नहीं थक रहे। हमारा यह लेख भी ऐसी ही एक महिला साज़िया पर आधारित है।


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नमस्कार दोस्तो आज का लेख समाज के बहुत ही संजीदा विषय पर आधारित है। जिसे आप के ही बहुत संजीदा लेखक संजीव शेखर जी द्वारा लिखा गया है। जो की पहले भी अपने संजीदा लेख से हम सभी के समक्ष समाज की समस्याओ को उठाते रहते है। हमारी वेब साईट और हमारे किसी भी लेख का उद्देश किसी की धार्मीक भावनाओ को आहत करना नही है।


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# यह कैसी तलाक.....।


तलाक, पति-पत्नी के मध्य तर्कों, गबाहों, सफाइयों एवं रज़ामंन्दी की रौशनी में सशर्त एक समझौता होना चाहिए। यह सिर्फ एक पक्ष(पति या पत्नी) का फैसला या फिर तत्क्षण लिया गया निर्णय कतई नहीं हो सकता।


यह समाज में पति-पत्नी में किसी एक पक्ष के द्वारा दूसरे पक्ष के शोषण से बचाव व उनके नैसर्गिक अधिकारों की रक्षार्थ उपयुक्त होनी चाहिए, न कि किसी एक की मर्जी, अंधविश्वासी खुन्नस, दबदबा या श्रेष्ठता जैसी भद्दी लिप्सा प्रदर्शित करने के लिए। मेरा यह लेख “ यह कैसी तलाक ” ऐसी ही एक मजबूर साज़िया की है। उमीद है आप सभी साज़िया का दुःख जरूर समझेगें। अब आप पढ़िये “ यह कैसी तलाक ” -


कुबूल है, कुबुल है, कुबुल है....। के ध्वनित संकल्प के साथ साज़िया और सोहराब ने सुख-दुःख में एक दूसरे के साथ रहने से लेकर साथ जीने-मरने तक की कसमें खायी और परिणय बंधन में बंध गये। एक नई ज़िन्दगी की शुरूआत के लिए बधाइयों के लाईन लग गयी। कोई नम आँखों से तो कोई हँसी-खुशी के साथ दुआएँ दे रहे थे और अंततः सभी रस्मों की हैप्पी इन्डिंग हो गई।


दरअसल सोहराब पेशे से एक डाँक्टर था और शहर के एक सरकारी अस्पताल में पोस्टेड था। साजिया भी उसी अस्पताल में नर्स का काम करती थी। साज़िया देखने में बहुत खूबसुरत थी इसलिए सोहराब किसी-न-किसी बहाने उससे मिलते जूलते रहता। दोनो में प्रैक्टिस के दौरान ही मेल-जोल बढ़ा और धीरे धीरे प्यार में बदल गया। दोनो ने एक होने का फैसला लिया, इसके बाद परिवार वालो ने भी अपनी स्वीकृती दे दी और उनका निकाह हो गया।


दोनो के दिन खुशी-खुशी बीतने लगे। कुछ दिन के बाद सोहराब की पोस्टिंग दूसरे शहर के एक अस्पताल में विभागाध्यक्ष के तौर पर हो गई। सोहराब सजिया को नर्स का काम छुड़वा कर साथ ले गया और दोनों वहीं शिफ्ट हो गए। कुछ दिनों बाद साजिया ने एक सुंदर सी बच्ची को जन्म दिया। सोहराब लड़का चाहता था इसलिए उसे कोई खास खुशी नहीं हुई। साज़िया के समझाने तथा अगली बार संभवतः लड़का होने के ढ़ाँढ़स देने पर धीरे-धीरे सब कुछ ठीक हो गया और फिर लगभग दो साल तक दोनों के रिश्ते नॉर्मल हीं बने रहे।


एक दिन सोहराब को पता जला कि साज़िया फिर माँ बनने वाली है, बेटा पाने की उसकी उम्मीद जोर पकड़ने लगी। उसके बाद वह हर शुक्रवार जाज़िया को दरगाह पर ले जाता, कलमा पढ़ता और दुआएँ मांगता। मजाक में ही सही सोहराब अक्सर साज़िया से कहते रहता, “ इस बार मुझे बेटा नहीं दिया तो तुम्हें जान से मार दूंगा। “ एक उच्च-स्तरीय पढ़ा लिशा नौजवान, उस पर एक डॉक्टर एसी बेवकूफों जैसी बातें करता, साज़िया कोई जवाब नहीं देती। वह जानती थी, कि “ यह सब कुछ खुदा के हाथ में है और वैज्ञानिक रूप से भी तो यह पुरूषों पर निर्भर करता है ”।


तक़दीर की विडम्बना हीं था, इस बार भी साज़िया ने एक बेटी को जन्म दिया। सोहराब यह खबर सुनकर सन्न रह गया जैसे उसके पैरोंतले ज़मीन हीं खिसक गई हो। इसके बाद वह जैसे साज़िया से घृणा करने लगा और दोनों के रिश्ते की मिठाश धीरे-धीरे खत्म होने लगी। शायद सोहराब अपने आप को ठगा सा महसूस करने लगा था। अब वह अपना ज्यादातर वक्त घर से बाहर ही रहने लगा। साज़िया की लाख कोशिशों के बावजूद उनकी आपसी दूरी कम नहीं हो पाई।


घुटन और खुन्नस के कारण सोहराब साज़िया को अपने गावैं छोड़ आया। वह कभी-कभार साल-छः महीने में ही घर आता-जाता। कुछ दिन ऐसे हीं चलता रहा। इन दूरियों के कारण दोनों के रिश्ते में थोड़ी नर्मता जरूर आई, पर अब ससुराल वाले भी साज़िया को प्रताड़ित करने लगे थे। अक्सर वे उसके साथ मार-पीट व गाली-गलौच करते थे। हर एक गलती पर भद्दी-भद्दी गालियाँ और ताने अब उसे चाय-नाश्ते की तरह मिलने लगा था। बेटा न दे पाने की दंश भूगत रही साज़ीया अपने मन को बहलाने और खुद को इस परिवेश से दूर रखने के लिए शहर के ही एक प्राईवेट अस्पताल में नर्स की नौकरी करनी चाही, पर परिवार वालों की धमकी व दबाव के चलते यह इरादा भी उसे छोड़ना पड़ा।

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यह कैसी तलाक.....
 

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