सेरोगेट मदर....


Writer:- संजीव शेखर Total page:-   1
Type:- सामान्य कहानी Page no.:- 1
Date:- 3/23/2017    
Description:- संतान प्राप्त करने लिए "सेरोगेट मदर " का सहारा, एक कानूनी प्रक्रिया के तहत कानूनी संरक्षण में सिर्फ प्राकृतिक रूप से जरूरत मंदों को ही लेने की व्यवस्था देश में होनी चाहिए। कानूनी व्यवस्था के आभाव में लोग अमानवीय सौख को पैसे के बूते पर पूरा करना अपनी शान समझते हैं और इन कुकृत्यों पर इनके जैसे सोच रखने-वाले इन्हे बधाई देते हैं। यह समाज हमारा है और इसमे हम ही सुधार ला सकते है। जिसके लिए किसी क्रान्ती की जरूरत नही है बस हम सब को अपनी सोच बदलने की जरूरत है।


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नमस्कार दोस्तो आज फिर हम आपके लिए एक नयी कहानी, नये विषय के साथ ले कर आये है। बहुत से पाठक हमे अपने विचार ईमेल के माध्यम से भेज रहे है जिसके लिए हम उनके आभारी है। हमारा पूरा प्रयास रहता है की हम सभी के ईमेल का उत्तर दे सके। पर अधिक ईमेल होने के वजह से ईमेल का उत्तर देने में थोड़ा समय लग जाता है पर हम सभी को उत्तर अवश्य करते है। आप सभी के विचार हमारे लिए बहु-मूल्य है।

आज की रचना भी आप मे से ही एक मित्र की भेजी हुई है। जिसका शीर्शक “ सेरोगेट मदर “ है। सेरोगेट साईसं का वो वरदान है जो एक नि:संतान दम्पती के जीवन में खुशीयं भर देता है। परतुं समाज में हर अच्छी चीज का दुर-उपयोग भी होता है। हमारे देश के गरीब लोग धन के लालच मे या फिर किसी मजबूरी मे इसका हिस्सा बन जाते है।

सरकार ने भी हाल ही मे सेरोगेसी को लेकर संसद में एक बिल की मंजूरी दी है जिसमें किराये की कोख (सरोगेसी) वाली मां के अधिकारों की रक्षा के उपाय किए गए हैं। साथ ही सरोगेसी से जन्मे बच्चों के अभिभावकों को कानूनी मान्यता भी देने का प्रावधान है।

बता दें कि कैबिनेट से पास सरोगेसी रेगुलेशन बिल 2016 में यह साफ है कि अविवाहित पुरुष या महिला, सिंगल, लिव-इन रिलेश्नशिप में रहने वाले जोड़े और समलैंगिक जोड़े भी अब सरोगेसी के लिए आवेदन नहीं कर सकते हैं। वहीं, अब सिर्फ रिश्तेदार में मौजूद महिला ही सरोगेसी के जरिए मां बन सकती है। अब हम आपका समय नष्ट ना करते हुए अपनी कहानी पर वापस आते है। सायद ही हम कभी एक महिला के त्याग को समझ सके। उमीद है आप को यह रचना बेहद पसंद आयेगी।



# सेरोगेट मदर....

कभी खुशियों की ठाठ में गुजर करने वाली निर्मला का दिन ऐसा पलटा जैसे कि पुरी कायनात ने हीं मुख मोड़ लिया हो | पति के देहान्त के बाद अकेली निर्मला तीन बच्चों का बोझ उठाते-2 इतनी कमजोर व बेबस हो चुकी थी कि अपना स्वाभिमान तक भूलकर एक सौखिया बिनव्याहे बाप बनने की चाह रखने वाले दौलतमंद व्यक्ति के बच्चे की सेरोगेट माँ बनने को तैयार हो गई। कुछ पैसे की लालच दे कर उस रंगरिले व्यक्ति ने उनकी कोख को नौ-दस माह के लिए खरीद लिया।

आर्थिक हालात की मारी बेचारी एक प्रकार की "ससहमत शोषण" को तैयार हो गयी | अब वह नौ-दस माह के लिए उस धनकुबेर की खरीदी जागीर हो चुकी थी। अपने तीनो बच्चों से ज्यदा सेरोगेट बच्चे की फिक्र करना उनकी मजबूरी बन गया।

निर्मला का तीसरा बच्चा मात्र एक साल का था माँ का दुध बंद करवा दिया गया और डब्बा वाला दुध थमा दिया गया। अन्य बच्चों के लिए एक दायी देख - रेख के लिए न्युक्त कर दिया गया। कुछ हीं दिन बाद छोटे बच्चे की तबियत बिगड़ गयी, कुछ दिन इलाज भी चला, पर उसे दवाई की नही बल्कि माँ की ममता की जरूरत थी।

आखिरकार बच्चा यह गम न सह सका और दम तोड़ दिया। एक तरफ बच्चे के खोने का गम ऊपर से ना रोने का दवाव, निर्मला की धड़कने थम सी गई थी। एक खुशी की तलास में लाखों की खुशी खो चुकी सत्ब्ध रहने लगी।

डॉकटर ने कहा ज्यदा गम करेगी तो पेट में पल रहे बच्चे पर बुरा असर पड़ेगा। ज़िन्दगी ऐसे दो राहे पर लाकर खड़ा करेगी इसका अंदाजा न था। अच्छे दिन की परछाँई तो क्या बुरे वक्त का बवन्डर लग रहा था।

कभी अपने फैसले को कोसती तो कभी ईश्वर को दसवें महिने की शुरूआत में ही उस मासूम को जन्म दिया, जिसे अपना कहने का भी हक न था, बगल में पालने में पड़ा बिलख रहा था देखने वालों का ताँता लगा हुआ था और बारी- बारी से सब धनकुबेर बिन व्याहे बने बाप को मुबारकबाद दे रहे थे, पर किसी की नजर उस माँ की तरफ भूल से भी नहीं घुम रही थी, जिसकी अमूल्य त्याग व कभी न भर पाने वाले जख्म की नासूर थी।

सभी बच्चे की शलामती की दुआएँ दे रहे थे, लालन - पालन की सतर्कता समझा रहे थे, पर उस माँ को क्या मिला था ? एक माह तक सीने से लगाकर पाला अब उसके अपनों के पास जाने का वक्त आ गया था।

समझौते के अनुसार उस व्यक्ति ने निर्मला के हाथ में पच्चीस हजार का चेक रखा और बच्चा लेकर चला गया। निर्मला के आँखों के सामने सिर्फ अंधेरा रह गया। वह उसे फिर कभी देख पाएगी या दखेगी भी तो पहचान पाएगी ? बस यही सवाल रह गया।

…………………….संजीव शेखर



मैं संजीव शेखर, इस छोटी सी कहानी के पिछे मेरा उद्देश्य, उन तमाम सेरोगेट माताओ की बेबसी व भावनाओं के साथ हो रहे खुलेआम खिलवाड़ को देश की जनता तक पहुचाना है। ताकि उन बेबस माँ के पक्ष में सभी एक साथ खड़े हों और इस प्रकार के अमानवीय सोच रखने व उसको बधाई देने वालों को सलाखों के पीछे लाया जा सके।

यह मेरी पहली रचना है जो कि www.apnikahani.biz के द्वारा प्राशित की जा रही है। जिसके लिए मै बहुत अभारी हू। उमीद है आप सभी को मेरी रचना और विचार जरूर पसंद आये होगें। आप अपने विचार मुझे मेरी ईमेल आईडी पर जरूर भेजे मेरी ईमेल आईडी- sanjeevarya2891@gmail.com है।

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