एक कथा बाबा काल भैरव जी की……


Writer:- सुन्दर लाल जी… Total page:-   11
Type:- लेख Page no.:- 10
Date:- 6/4/2015 1    
Description:- देव भूमी उत्तराखण्ड पर ये पहला लेख है जो की आपको उत्तराखण्ड की अदभुत लोक संस्कृती से अवगत करायेगा। ये लेख बाबा काल भैरव जी की उत्तराखण्ड मे अत्यनत मान्यता और उनके अदभुत चमत्कार का वर्णन है। जो की एक सत्य घटना पर आधारित है परंतु कुछ कारणों से व्यक्ति विशेष और स्थान के नाम बदल दिये गये है। ये घटना उत्तराखण्ड के बागेश्वर जिले की ही है परंतु गॉव का नाम बदल दियागया है। उमीद है आप लोगो को ये लेख पसंद आयेगा। धन्यवाद …. जय बाबा काल भैरवा ।


Page Number - 10

उत्तराखण्ड को देव भूमी कहा जता है उत्तराखंड के कण कण मे वहा के क्षेत्रीय देवी देवता का प्रभाव देखने को मिलता है जिसे वहा के स्थानिय लोग अपनी संस्कृति और रीति रिवाज से पूजते है।

उत्तराखंड के स्थानीय देवी देवता मे विविधता के कारण उनकी पूजा की विधी भी विशेष होती है जिसे हम जागर कहते है। अगर जागरण और जागर मे हम अनतर करना चाहे तो मेरी समझ से दोनो पूजा की विधी को आप एैसे विविध कह सकते हो। जागर मे देवता और भक्त दोनो अपनी बात रखते है पर जागरण में केवल भक्त ही अपनी प्रार्थना भगवान के सम्मुख रखता है। वैसे पूजा की विधी कोई भी हो हर पूजा का एक ही लक्ष्य होता है भक्त का अपने देवता से जुड़ना। जो की पूजा की हर विधी सम्भव बनाती है। तभी तो भक्त उस विधी का चयन करता है। हर क्षेत्र की अपनी विवेषता होती है और देव भूमी की पूजा विधी उसकी अपनी अलग विवेषता है। चलिए अब हम अपनी कथा पे आते है।

रात को सभी लोग शुखिया के घर पर एकत्र हो जाते है। शुखिया और हरूली ने भी सारी तैयारी कर रखी होती है । जगरी दवारा जागर भी समय से शुरू हो जाती है। जागर मे घर के ईष्ट देवता शुखिया को एक पुरानी धटना याद दिलाते है। जब शुखिया का छोटा भाई मोहन एक वर्ष शहर से काम करने के बाद अपने परीवार के साथ वापस गॉव आया था। घर आते ही शुखिया के छोटे भाई मोहन ने अपने बड़े भाई से अपने दिये हुए गहने वापस मांगे।

जो उसने शहर जाते समय अपने बड़े भाई को उन्हें सम्भाल के रखने के लिए दिये थे। पर जब मोहन ने शुखिया से अपने गहने मांगे तो शुखिया ने उसे ये कह के घर से बाहर निकाल दिया था की उसे मोहन ने शहर जाते समय कोई गहने नहीं दिये थे। बल्कि जो भी गहने को घर के बटवारे मे मोहन को दिये गये थे। वो भी मोहन ने बेंच के पैसे ले के शहर कमाने के लिए चला गया था।

ये ही नहीं उस समय शुखिया ने अपने छोटे भाई को सभी गॉव वालो के सामने झूठा कह के अपमानित भी किया था। अपने हुए अपमान को मोहन सहन नहीं कर पाया और उसने बाबा काल भैरव जी के मंदिर मे जा के उनका आवाहन कर के उन्हें इन्साफ करने के लिए विनती की। और अब उसकी विनती को सुनते हुए स्वयं बाबा काल भैरव जी तुम्हें दण्ड देने के लिए आये है। अभी भी तुम्हे कोई जान माल की हानी नहीं हुई है पर आगर तुमने अभी भी अपनी गलती स्वीकार नहीं की तो और भी नुकसान हो सकता है।

ये सब सुन के शुखिया और उसकी पत्नी हरूली देवता से माफी मांगते है और कहते है हे ईष्ट देवता मुझसे गल्ती हो गयी। मै धन के लालच मे आ गया था। पर अब में समझ गया हू मैने अपने छोटे भाई के साथ बहूत अन्याय किया है। मैं वचन देता हू की मै उसका सारा धन उसे वपस कर दुंगा और अपने व्यवहार के लिये छमा भी मामूंगा। हे ईष्ट देवता मेरी गलती की सजा मेरे परीवार को नहीं देना। गलती मेरी है। और इस तरह जागर समाप्त हो जाती है।

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एक कथा बाबा काल भैरव जी की……
 

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