राजूला – मालूशाही की अमर प्रेम कथा


Writer:- सुन्दर जी Total page:-   12
Type:- प्रेम कहानी Page no.:- 12
Date:- 7/7/2016 1    
Description:- राजूला मालूशाही उत्तराखण्ड की प्रशिद्ध प्राचीन प्रेम कथा है। जिसे उत्तराखण्ड की कुमाँउनी और गढ़वाली भाषा के लोक गीतो में गाया जाता है। उत्तराखण्ड के प्राचीन इतिहास को अपने में संजोय, ये कथा उत्तराखण्ड का हृदय है। यह कथा उत्तराखण्ड के बैराठ राज्य के कत्यूरी राज वंश के राजा मालूशाही और भोट राज्य के धनी व्यापारी सुनपती शौक्य की पुत्री राजूला शौक की अमर प्रेम कथा है। जिसे युगों युगों तक याद किया जायगा। किस तरहा से एक स्त्री ने अपना पती व्रता धर्म निभाया। और कैसे एक राजा ने अपने प्रेम के लिए राज्य पाठ त्याग के योगी बन जंगल जंगल विचिरण किया। आप सभी का स्वागत है इस रोचक प्रेम कथा में।


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मालूशाही राजूला, अपने मामा और गुरू गोरखनाथ के साथ बैराठ आ गये। जहाँ मालूशाही की माता धर्मा देवी ने अपनी पुत्र के आने की खुशी में पूरे राज्य में उत्सव का ऐलान कर दिया। इस तरह राजूला और मालूशाही अपने बैराठ राज्य में हसी खुशी रहने लगे।
कदु दिन बिती गै ,कदु बिती गै साल।
राजूला-मालूशाही कौ, युगौं करि याद।।

यह कथा उत्तराखण्ड के लोक गीतों में सुन्ने को मिलती है। बहुत प्राचीन कथा होने को कारण इस कथा के बहुत सी व्याख्या हुई है। जैसे कुछ गीतों में नौ लाख कत्यूरों के साथ राजूला और मालूशाही के भी मरने की बात कही जाती है। और कुछ में सभी के वापस आने की बात। परंतु हमने ये कथा अपने गाँव के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति गोपाल राम गोस्वामी जी के अनुसान सुनाये जाने पर आधारित है। और कुछ कुमाऊनी लोक गीत की पंक्तिया भी इस कथा में सुमलित की है जो की इनके द्वारा हमें सुनाई गई है। हो सकता है इस कथा में कोई त्रुटी हो।

हम अपनी सभी त्रुटी को सुधारने को हमेशा तैयार है। आपके पास अगर कोई सुझाव या कथा के विषय में कोई जानकारी है तो हमें अवश्य हमारी वेब साईट की ईमेल आईडी (admin@apnikahani.biz) पर सुचित करें। हम इस कथा में सुधार करने का प्रयास करेगें। हमारा मकसद ना तो किसी की आस्था को ठेस पहूचाना है। और न ही संस्कृती का अपमान करना। हम तो केवल लोगों तक प्राचीन कथाओ को पहूचाना चाहते है। उमीदं है आप सभी को हमारी ये रोचक प्रेम कथा पसंद आयी होगी।

जय बाबा गुरू गोरखनाथ।।

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राजूला – मालूशाही की अमर प्रेम कथा
 

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