राजूला – मालूशाही की अमर प्रेम कथा


Writer:- सुन्दर जी Total page:-   12
Type:- प्रेम कहानी Page no.:- 2
Date:- 7/7/2016 1    
Description:- राजूला मालूशाही उत्तराखण्ड की प्रशिद्ध प्राचीन प्रेम कथा है। जिसे उत्तराखण्ड की कुमाँउनी और गढ़वाली भाषा के लोक गीतो में गाया जाता है। उत्तराखण्ड के प्राचीन इतिहास को अपने में संजोय, ये कथा उत्तराखण्ड का हृदय है। यह कथा उत्तराखण्ड के बैराठ राज्य के कत्यूरी राज वंश के राजा मालूशाही और भोट राज्य के धनी व्यापारी सुनपती शौक्य की पुत्री राजूला शौक की अमर प्रेम कथा है। जिसे युगों युगों तक याद किया जायगा। किस तरहा से एक स्त्री ने अपना पती व्रता धर्म निभाया। और कैसे एक राजा ने अपने प्रेम के लिए राज्य पाठ त्याग के योगी बन जंगल जंगल विचिरण किया। आप सभी का स्वागत है इस रोचक प्रेम कथा में।


Page Number - 2

तभी राजा दालूशही ने थोड़ी दूर एक पत्थर पर एक सुन्दर सी महीला को बैठा देखा। राजा दालूशाही उस महिला को देखते ही रह गये। वो महिला बहूत सुन्दर और बहूत सारे अनमोल आभूष्णो सजी हुई थी।

राजा ने रानी धर्मा देवी को उस महिला की ओर इशारा करते हुए प्रश्न किया लगता है वो देवी भी किसी राज घराने या किसी संमपन्न परिवार से है। जब रानी ने खूबसूरत और कीमती गहनो से सजी हुई स्त्री को देखा तो देखती ही रहगयी। और उनसे मिलने के लिए राजा दुलाशाही से आग्रह करने लगी।

विदेशी मुलुक आय, सजी धजी बेरा।
गांउली सिंगार देखी, क्या कनू के बेरा।।

गज कौ धम्यल वीक, पशमीण शाल।
भोटमा बतानी भाई, भौत धन माल।।

रानी के आग्रह करने पर राजा और रानी दोनो उस स्त्री से मिलने गये। राजा ने कहा हे देवी आप यहा किसके साथ आयी हो। उस स्त्री ने कहा – “ मै यहा अपने पती के साथ आयी हू। आप लोग कौन है ? “
राजा ने कहा – मै बैराठ नरेश राजा प्रितम दुलाशाही हू , और यहा अपनी पत्नी धर्मा देवी के साथ आया हू।

रानी धर्मा देवी कहती है – हे देवी आप कौन हो और कहा से आयी हो ?

स्त्री कहती है - मै शौंकाचल के बड़े व्यपारी सुनपति शौक की पत्नी गांउली हू। संतान प्राप्ती की इच्छा से मै और मेरे पती मकर स्नान करने हरिद्वार आये है।

यह सुन कर रानी धर्मा देवी कहती है़ – हम भी यहा संतान प्राप्ती की इच्छा से हरिद्वार स्नान के लिए आये है।

राजा दुलाशाही और सुनपति शौक के मिलते ही वे जल्द ही अच्छे मित्र बन गये। पूजा और स्नान भी साथ मे ही किया। और एक दूसरे से विदा होने से पहले उन्हें एक विचार आया। की क्यू ना इस मित्रता को नाम दिया जाय।

दोनो दम्पतियों ने सोचा की यहा से जाने के बाद अगर हम दोनो परिवार मे किसी के यहा भी अगर पुत्र या पुत्री हुई तो हम उनका विवाह कर देगें। इतना ही नहीं राजा और सुनपति शौक ने तो प्रण भी लिया। और अपनी मित्रता को समधी के बंधन मे बदल दिया और एक दूसरे को अल्विदा कह कर अपने अपने निवास स्थान आ गये।

पर जब सुनपती शौक अपने घर को आ रहा था तो उसे आचानक ध्यान आया की अगर मेरे यहा पुत्री हुई तो उसे अपने वचन के अनुसार उसका विवाह बैराठ नरेश के पुत्र से कराना होगा। बैराठ राज्य तो हमारे भोट राज्य से बहूत दूर है। मै अपनी संतान से दूर कैसे रह पाउगां । उसे लगने लगा की शायद ये रिश्ता करके उसने गलती कर दी।

परंतु जब घर आते समय रास्ते मे बागेश्वर स्थित बागनाथ धाम आया तो सुनपति शौक ने कहा हे बाबा बागनाथ जी मेरी विनती सुनलो और मुझे पुत्र रतन का आशिर्वाद देना। मेरे वचन और संतान शुख दोनो को बचा लेना। परंतु होनी को कुछ और ही मंजूर था।

एक वर्ष बाद ही दोनो परिवार में नये मेहमान आने की खुश खबरी आयी। जल्द ही रानी धर्मा देवी ने एक तेजस्वी पुत्र को और देवी गांउली ने अपनी ही समान सुन्दर सी पुत्री को जन्म दिया।

राजकुमार का नाम मालूशाही तो देवी गांउली ने अपनी पुत्री का नाम राजूला रखा। राजा मालूशाही ने पूरे राज्य मे खुशियाँ मनायी और सुनपति शौक भी अपनी प्यारी सी पुत्री के जनमोत्सव का आयेजन किया।

दोनो ही परिवार संतान शुख में खो गये। धीरे धीरे समय बीत्ता चला गया। और दोनो ही परिवार अपने दिये वचन को भूल गये। राजा दुलाशाही के पुत्र मालूशाही अभी बाल्यावस्था में ही थे की कुछ कारणो से राजा दुलाशाही की मृत्यु हो गयी। राज पुरोहीतो के दवार राजकुमार के ग्रह कमजोर होने की अशंका के रहते जल्द ही राजकुमार मालूशाही का विवाह बल्यावस्था मे ही कर दिया गया।

राजकुमार मालूशाही बाल्यावस्था से ही कला और सौन्दर्य के प्रशंसक रहे और रचनात्मक कार्य मे ही हमेशा व्यस्थ रहते। जिसकी वजहा से वो राज काज में इतना समय नहीं दे पाते। उनको राज काज के प्रति रूचि लाने के लिए उनकी युवा अवस्था में आने तक राजकुमार मालूशाही के सात (7) विवाह हो चुके थे। उन्हें राजगदृदी तक का भार भी सौप दिया गया था। परंतु राजा मालूशाही अपने में ही खोये रहते थे। जंगलो मे भटकना और साधु संता का साथ उन्हें बहुत भाता था।

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राजूला – मालूशाही की अमर प्रेम कथा
 

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