एक कथा बाबा काल भैरव जी की……


Writer:- सुन्दर लाल जी… Total page:-   11
Type:- लेख Page no.:- 2
Date:- 6/4/2015 1    
Description:- देव भूमी उत्तराखण्ड पर ये पहला लेख है जो की आपको उत्तराखण्ड की अदभुत लोक संस्कृती से अवगत करायेगा। ये लेख बाबा काल भैरव जी की उत्तराखण्ड मे अत्यनत मान्यता और उनके अदभुत चमत्कार का वर्णन है। जो की एक सत्य घटना पर आधारित है परंतु कुछ कारणों से व्यक्ति विशेष और स्थान के नाम बदल दिये गये है। ये घटना उत्तराखण्ड के बागेश्वर जिले की ही है परंतु गॉव का नाम बदल दियागया है। उमीद है आप लोगो को ये लेख पसंद आयेगा। धन्यवाद …. जय बाबा काल भैरवा ।


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हमारा मकसद केवल उत्तराखण्ड की संस्कृती के बारे मे आप सबको बताना है। अगर आप को इस लेख मे कोई त्रुटी लगे तो हमें जरूर बतार्इएगा । हम आप के जरीये अपने लेख को त्रुटी मुक्त जरूर करना चाहेगें । चलिए अब हम अपनी कथा पे आते है।

ये कथा उत्तराखण्ड के बागेश्वर जिला के एक छोटे से गॉव की है। जहा एक परीवार अपने पूरे परीवार के साथ बहूत खुशहाली से रह रहा था। एक पती़-पत्नी और उनके दो बच्चे। जैसा की उत्तराखण्ड मे आज भी लोगो का मुख्य व्यवसाय खेती ही है। वैसे ही इस परीवार का मुखिया जिसका नाम शुखिया है वो भी दिन रात अपने खेतो मे अपने पत्नी हरूली के साथ मेहनत कर के अपने परीवार का लालन पालन करते थे। इतना तो वो दोनो कमा ही लेते थे की उनके पास कोई कमि न थी। घर मे दूध के लिए एक भैस और खेती के लिए दो बैल भी थे। और उनो दोनो बच्चे भी अच्छे थे। एक बड़ा लड़का हरू और छोटी बेटी परूली । संतोष दशवी मे तो परूली अभी पाचवी मे थी। सब कुछ अच्छा चलरहा था और पूरा परीवार खुशी से अपना जीवन गुजार रहा था।

एक दिन की सुबहा जब हरूली दूध दूने के लिए भैस के तबेले मे गयी। उत्तराखण्ड मे गाय और भैस के लिए बने तबेले को गुवाड़ कहा जाता है। और गुवाड़ अपने तहने वाले घर से दूर ही होते है। पर वहा जनवरो की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है। उत्तराखण्ड मे पशु को भी धन ही समझा जाता है और पशू की खूब सेवा की जाती है। पर जब आज सुबह हरुली ने दूध दूने के लिए भैस के पास गयी तो भैस ने उसे पास ही नही आने दिया। हरूली अपने घर की पली इतनी पुरानी भैस के एैसे व्यवहार पर चिंता मे आगयी और क्रोध मे आके भैस की जम के पिटाई भी करदी। बड़ी मशकिल से भैस के पास गयी तो देखा की भैस के थन मे तो बूंद भर भी दूध नहीं है। पहले तो उसे लमा शायद भैस के बच्चे ले पिलिया होगा पर भैस का बच्चा तो अभी भी दूर बंधा हुआ था और भूक के मारे चिल्ला रहा था। हरूली को कुछ समझ नहीं आया तो वो आज खाली बर्तन ही ले के वापस आ गयी।

घर आते ही हरूली शुखिया पर चिल्लाने लगती है पता नहीं रात को आके किसने हमारी भैस दूली आज तो भैस ने एक बूंद दूध नहीं दिया ये देखो खाली बर्तन ही लायी हू मै। शुखिया कहता है तो चिल्ला क्यू रही हो सायद भैस बिमार होगी शाम को फिर भैस लगा के देख लेना।

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एक कथा बाबा काल भैरव जी की……
 

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