राजूला – मालूशाही की अमर प्रेम कथा


Writer:- सुन्दर जी Total page:-   12
Type:- प्रेम कहानी Page no.:- 3
Date:- 7/7/2016 1    
Description:- राजूला मालूशाही उत्तराखण्ड की प्रशिद्ध प्राचीन प्रेम कथा है। जिसे उत्तराखण्ड की कुमाँउनी और गढ़वाली भाषा के लोक गीतो में गाया जाता है। उत्तराखण्ड के प्राचीन इतिहास को अपने में संजोय, ये कथा उत्तराखण्ड का हृदय है। यह कथा उत्तराखण्ड के बैराठ राज्य के कत्यूरी राज वंश के राजा मालूशाही और भोट राज्य के धनी व्यापारी सुनपती शौक्य की पुत्री राजूला शौक की अमर प्रेम कथा है। जिसे युगों युगों तक याद किया जायगा। किस तरहा से एक स्त्री ने अपना पती व्रता धर्म निभाया। और कैसे एक राजा ने अपने प्रेम के लिए राज्य पाठ त्याग के योगी बन जंगल जंगल विचिरण किया। आप सभी का स्वागत है इस रोचक प्रेम कथा में।


Page Number - 3

राजकुमार मालूशाही बाल्यावस्था से ही कला और सौन्दर्य के प्रशंसक रहे और रचनात्मक कार्य मे ही हमेशा व्यस्थ रहते। जिसकी वजहा से वो राज काज में इतना समय नहीं दे पाते। उनको राज काज के प्रति रूचि लाने के लिए उनकी युवा अवस्था में आने तक राजकुमार मालूशाही के सात (7) विवाह हो चुके थे। उन्हें राजगदृदी तक का भार भी सौप दिया गया था। परंतु राजा मालूशाही अपने में ही खोये रहते थे। जंगलो मे भटकना और साधु संता का साथ उन्हें बहुत भाता था।

और इधर राजूला भी धीरे धीरे बड़ी हो रही थी । राजूला बाल्यअवस्था से ही बहुत सुंदर कन्या थी और नृत्य और गायन कला मे रुची रखती थी, और साथ ही बहूत समझदार और तर्कशक्ति भी उनके गुड़ों मे शामिल थे।

एक बार राजूला ने अपनी मां देवी गांउली से पांच प्रश्न किये। -

“ मेरी प्यारी मां मुझे ये बताओ “

चारो दिशाओं में से कौन सी दिशा सबसे प्यारी है ?

और पेड़ो मे सबसे बड़ा पेडं कौन सा है ?

सभी गंगाओं में सबसे ज्यादा महत्व कौन सी गंगा का है ?

और देवो में कौन से देव सर्वश्रेष्ठ है ?

राज्यों में कौन सा राज्य सबसे अच्छा है ?

देवी गांउली अपनी प्यारी पुत्री दवारा इतने सारे प्रश्न पूछे जाने पर मुस्कराते हुए उसके प्रश्नो का उत्तर देती है।

हे पुत्री ǃ

चारो दिशाओं में सबसे प्यारी दिशा पूर्व दिशा है , क्यूकी पूर्व दिशा ही नवखण्डी प्रथ्वी को प्रकाशित करती है।

पेड़ों में सबसे बड़ा पेड़ है पीपल का , क्यूकी पिपल के पेड़ पर बहूत से देवता निवास करते है ।

और देवो मे सर्वश्रेष्ठ देव है महादेव शिव-शंकर, क्यूकी वो ही एक मात्रदेव है जो केवल जल चड़ाने से ही प्रशंन हो जाते है। इसलिए उनहें आशुतोष भी कहा जाता है।

राज्यों में सबसे अच्छा राज्य है बैराठ राज्य , क्यूकी बैराठ राज्य के क्त्यूरी राजाओं से प्रजा हमेंशा प्रशंन रहती है। बैराठ राज्य मे प्रजा को न्याय और शुखी जीवन का अधीकार है।

यह सुन के राजूला कहती है “ मॉ मै तो बैराठ राज्य में ही विवाह करूगीं। “ अपनी प्यारी पुत्री के मुह से विवाह की बात सुनकर देवी गांउली जोर जोर से हसने लगती है। मॉ के दवारा अपना परीहास होता देख रजूला रूठ के चली जाती है।

कछ समय यू ही व्यतीत होने के बाद दोनो ही अपनी युवा अवस्था में आ जाते है। और अब राजूला और मालूशाही दोनो को विचित्र स्वपन आने शुरू हो जाते है। कभी उन्हें गंगा नदी की बड़ी बड़ी लहरों के स्वपन आते है तो कभी हरीदवार मे लगने वाले विशाल मेले के।

राजूला और मालूशाही दोनो ही अपने माता पिता को इन स्वपन के बारे मे बताते है। परंतु माता पिता उन्हें केवल स्वपन कह के टाल जाते है। पर दोनो ही विचलित रहने लगते है।

व्यपारी सुनपति शौक पुत्री के चहरे पर अशंकाओ को देख के चिंतित होता है परंतु वो अपनी पुत्री को अपने से दूर नहीं करना चाहता था।

Page Number - 3




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राजूला – मालूशाही की अमर प्रेम कथा
 

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