चमत्कारी ग्वेलज्यू महाराज जी


Writer:- सुन्दर लाल जी Total page:-   9
Type:- सामान्य कहानी Page no.:- 3
Date:- 12/25/2014    
Description:- ग्वेलज्यू (गोलू) महाराज जी पूरे उत्तराखड पूजे जाने वाले देवता ही नहीं बल्कि पूरे उत्तरखडं में न्याय दिलाने वाले देवता के नाम से भी जाने जाते है। गोलू जी जितने खुद चमत्तकारी थे। उतनी ही चमत्तकारी उनकी कथा भी है। सभी को उन का आर्शिवाद प्राप्त हो।


Page Number - 3

राजा झालूराई जी ने मुनी के कहे अनुसार भैरव देव को प्रसन्न करने के लिए खूब तप और पूजा की । एक दिन भैरव जी ने राजा से प्रसन्न हो के उन्हें सपने मे दर्शन दिए और कहा ǃ हे राजन हम तुम्हारी पूजा से प्रसन्न है। हम तुम्हारे पुत्र के रूप मे अवतार भी लेने को तैयार है। परंतु संसार मे कोर्इ भी साधारण स्त्री हमें अपने गर्भ में रोक नहीं पायेगी । राजन अगर तुम कोई ऐसी शक्तिशाली स्त्री से विवाह कर सको जो मुझे अपने गर्भ में रोक सके तो मै जरूर तुम्हारे घर मे जन्म लुगां। इस स्वपन के बाद से राजा ने चारो दिशा में एक शक्तिशाली स्त्री की खोज शुरू करदी। पर राजा को कोई भी ऐसी स्त्री नहीं मिली जो भैरव जी को अपने गर्भ मे रोक सके।

कहा जाता है । एक बार राजा शिकार खेलते खेलते बहुत दूर निकल गये। वहा उन्हें जब प्यास लगी तो उनहों ने अपने सैनिक भेजे और पानी लाने के लिए कहॉ । पर जो सैनिक गया वो वापस नहीं आया। धिरे-धिरे सभी सैनिक चले गये और लौट के नहीं आए। थक कर राजा को ही पानी की तलाश के लिए जाना पड़ा । कुछ दूर चलते ही राजा को एक पानी का तलाब मिला राजा पानी देख के खुश हुए । राजा थक जो गये थे और बहुत दे से पानी न मिलने से बहुत अधीर भी हो गये थे। उन्हो ने वही तलाब के किनारे पडे अपने सैनिक भी देखे पर राजा अपनी प्यास से अधीर हो के पहले पानी पी कर अपनी प्यास बुझाना चाहा ।

जैसे ही राजा ने जल ग्रहण करने को तलब के समीप गये । एक स्त्री के स्वर राजा के कानो में पडे। दूर हो जाओ इस तलाब से । ये तलाब मेरा है । तुम्हे जल ग्रहण करने से पहले मेरी आज्ञा लेनी होगी वरना जो हाल तुमहारे सैनिकों का हुआ है वो ही तुमहारा भी होगा। राजा ने कहा हे देवी मुझे अभी जल की अति अवश्यकता है मुझे बहुत तेज प्यास लगी हुई कर्पा करके आप हमें थोडा जल ग्रहण करने की अनुमती दें।

देवी नहीं मानी और राजा से कहा अगर जल चाहिए तो पहले उन दो लड़ रहे बैलो को अलग करना होगा। राजा ने देखा की थोड़ी दूर पर दो विशालकाय बैल अपस में सिंगह फसाये एक दुसरे से पूरी ताकत से लड़ रहे थे। राजा ने बैलो देखते ही हार मान ली और कहा हे देवी मै बहुत थक चुका हु मुझ में खड़े होने की भी ताकत नहीं बची है। ये सुनते ही उस देवी ने खुद जा के दोनो बैलो को उनके सिंग्ह पकड़ के अलग कर दिया ।

राजा झालूराई यह देखते ही रह गये । एक सुन्दर और कोमल सी दिखने वाली स्त्री ने लड़ते हुए इतने विशालकाय बैलो को इतने असानी से कैसे अलग कर दिया। राजा उस स्त्री की शक्ति को देखते रह गये और अपनी प्यास भूल कर उस स्त्री से कहा । हे देवी तुम कौन हो । जरूर तुम कोई दिव्य कन्या हो वरना दो लड़ते हुए बैलो को अलग करने मे तो मुझे भी पसीने आ जाते। क्या आप मुझे अपना परिचय बता सकती है।

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चमत्कारी ग्वेलज्यू महाराज जी
 

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