एक कथा बाबा काल भैरव जी की……
Writer:- |
सुन्दर लाल जी…
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Total page:- |
11
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Type:- |
लेख
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Page no.:- |
3
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Date:- |
6/4/2015 1
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Description:- |
देव भूमी उत्तराखण्ड पर ये पहला लेख है जो की आपको उत्तराखण्ड की अदभुत लोक संस्कृती से अवगत करायेगा। ये लेख बाबा काल भैरव जी की उत्तराखण्ड मे अत्यनत मान्यता और उनके अदभुत चमत्कार का वर्णन है। जो की एक सत्य घटना पर आधारित है परंतु कुछ कारणों से व्यक्ति विशेष और स्थान के नाम बदल दिये गये है। ये घटना उत्तराखण्ड के बागेश्वर जिले की ही है परंतु गॉव का नाम बदल दियागया है। उमीद है आप लोगो को ये लेख पसंद आयेगा। धन्यवाद …. जय बाबा काल भैरवा ।
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Page Number - 3
घर आते ही हरूली शुखिया पर चिल्लाने लगती है पता नहीं रात को आके किसने हमारी भैस दूली आज तो भैस ने एक बूंद दूध नहीं दिया ये देखो खाली बर्तन ही लायी हू मै। शुखिया कहता है तो चिल्ला क्यू रही हो सायद भैस बिमार होगी शाम को फिर भैस लगा के देख लेना।
हरूली – क्यू न चिल्लाउू एक तो मै अकेली जाती हू दूध दूने। पता है आज कितना परेशान किया भैस ने मुझे। बड़ी मुशकिल से अपने थन पे हाथ लगाने दिया । और अब भैस के बच्चे को क्या खिनाओ गे वो भी तो भूख से चिल्ला रहा है। जाने क्या हो गया मेरी इतनी प्यारी भैस को।
शुखिया – हॉ, भैस तो बड़ी सीधी ही थी रोज ही तो तू अकेली दूने जाती है और कभी कोई परेशानी नहीं की उसने। सायद कोई बात है। पर तुम चिन्ता नही करो। और खेत पर चलने की तैचारी करो आज बहूत काम है। मै भैस के बच्चे को थोड़ा आटे को पानी मे घोल के पिला देता हु कुछ तो पेट मे जायगा उसके। फिर शाम को देखेगें भैस को, ठीक है। चलो खेत मे ही मिलते है। इतना कहके खुशिया और हरूली दोना अपने अपने काम मे चले जाते है। और शाम को थक हार के वापस घर आते है।
हरूली – चलो पहने भैस को दू आते है फिर चुलहा जलाती हू वरना अंधेरा जादा हो जायगा। शुखिया - जरा बड़ा बर्तन ले लो तूम सुबहा दूध नहीं दिया है तो सायद अब वो ज्यादा दूध दे रोज से।
हरूली – पहले वो दूध तो दे । सुबहा जैसा किया था भैस ने, मुझे अभी भी उसका दूध देना मुशकिल ही लगता है। और अगर ज्यादा दे गी भी तो आप उसके बच्चे को पिला देना सारा दूध। बेचारा सुबह से भूका ही होगा वो।
शुखिया - अरे तूम चिन्ता नहीं करो दूध देगी भैस। जनवर है कभी कभी हो जता है। वैसे बच्चे को सुबहा आटा, पानी मे घोल के पिलाया था। तो भूका तो नहीं होगा ।
शुखिया और हरूली वहा पहुचते है तो भैस का बच्चा उन्हें देखके चिल्लाने लगता है। शुखिया और हरूली समझ जाते है की बच्चे को भूक लगयी है। हरूली जल्दी से जा के बच्चे को खोल देती है जिससे वो खुद भैस के पास जके दूध पिसके। पर भैस उसे पास ही नही आने देती है। बच्चे के बार बार प्रयास करने पर भी उसे लात मारके दूध पिने नहीं देती है। और गुस्से मे उसे माने भी भी जाती है। यह देख के शुख्यिा कहता है तुम बच्चे को बान्ध दो आज मै दूध दूता हू । हरूली जल्दी से भैस के बच्चे को बान्ध देती है।
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