चमत्कारी ग्वेलज्यू महाराज जी


Writer:- सुन्दर लाल जी Total page:-   9
Type:- सामान्य कहानी Page no.:- 4
Date:- 12/25/2014    
Description:- ग्वेलज्यू (गोलू) महाराज जी पूरे उत्तराखड पूजे जाने वाले देवता ही नहीं बल्कि पूरे उत्तरखडं में न्याय दिलाने वाले देवता के नाम से भी जाने जाते है। गोलू जी जितने खुद चमत्तकारी थे। उतनी ही चमत्तकारी उनकी कथा भी है। सभी को उन का आर्शिवाद प्राप्त हो।


Page Number - 4

राजा झालूराई यह देखते ही रह गये । एक सुन्दर और कोमल सी दिखने वाली स्त्री ने लड़ते हुए इतने विशालकाय बैलो को इतने असानी से कैसे अलग कर दिया। राजा उस स्त्री की शक्ति को देखते रह गये और अपनी प्यास भूल कर उस स्त्री से कहा । हे देवी तुम कौन हो । जरूर तुम कोई दिव्य कन्या हो वरना दो लड़ते हुए बैलो को अलग करने मे तो मुझे भी पसीने आ जाते। क्या आप मुझे अपना परिचय बता सकती है।

स्त्री कहती है मै कोई दिव्य कन्या नहीं हु। मै तो पंचदेव की बैहन कालिंगा हू। राजा ने कहा हे देवी मै चम्पावत का राजा झालूरार्इ हू । क्या मै आपके समक्ष आपसे विवाह करने का प्रस्ताव रख सकता हू। तो वो स्त्री कहती है इसके लिए आपको मेरे भाई पंचदेव से बात करनी चाहिए। तब राजा ने पंचदेव से मिल कर अपनी सारी बात समझाई । पंचदेव ने भी इसे भैरव देवता की इक्षा समझ के रिश्ता स्वीकार कर लिया । और खुशी से अपनी बैहन कालिंगा का विवाह राजा से कर विदा कर दिया।

देवी कालिंगा बहुत ही सुंदर तो थी ही और वो भविष्य में राजा को उत्तराधिकारी भी देने वाली है । राजा अपनी नयी रानी के प्रेम में कुछ ज्यादा व्यथ रहने लगे। परंतु राजा की पहली सात रानीयों को यह पसंद नहीं आया। वे सभी रानी कालिगां से ईष्या करने लगी। और रानी कालिगां के लिए नये नये शडयन्त्र रचने लगी । जब रानी गर्भवती हुई तो उन सातो रानी से रहा नहीं गया और ज्यतिष्यो से मिल कर एक शडयन्त्र रचा ।

उन सभी रानीयों ने रानी कालिगां से कहा कि ग्रहों की दिशा और दशा सही नहीं है । तुमहारा अपने पुत्र को तुरंत देखना शुभ नहीं रहेगा। और बच्चे के जन्म के समय रानी कालिगां की ऑखों पर काली पट्टी बांध दी । जिससे वे जन्म के समय अपने बच्चे को न देख सके। और जैसे ही इस अलौकिक बच्चे ने जन्म लिया । उन सातों रानियों ने बच्चे को रानी के पास से ले गयी और खून से लागा एक सिल्बट्टा रानी के पास रख दिया ।

उन सातों रानीयो ने उस अलौकिक बच्चे को मारने के लिए गायों के अस्तबल मे फेंक दिया जिससे कि बच्चा गायों के पैरो के नीचे दब के मारा जाय। पर शायद इस अवतारी बच्चे को मारने के लिए इतना काफी नहीं था। जब रानीयों ने देखा तो बच्चा गाय का दूध पीकर गायों के बीच खेल में लगा हुआ है।

Page Number - 4




Please send Your complaint and Suggestion at our Email Id(sundar_lal@ymail.com )

______________________________________________________________________________
______________________________________________________________________________
Serise of this story
चमत्कारी ग्वेलज्यू महाराज जी
 

Read Hindi stories, Poetry, Uttrakhand stories and many good thoughts on the web site www.apnikahani.biz

उत्तराखण्ड की कहानियाँ


चमत्कारी ग्वेलज्यू महाराज जी,11उत्तराखण्ड के देवता गंगनाथ जी,11एक कथा बाबा काल भैरव जी की,11 राजूला – मालूशाही की अमर प्रेम कथा...

Custom Search
Search the Web with WebCrawler