एक कथा बाबा काल भैरव जी की……


Writer:- सुन्दर लाल जी… Total page:-   11
Type:- लेख Page no.:- 4
Date:- 6/4/2015 1    
Description:- देव भूमी उत्तराखण्ड पर ये पहला लेख है जो की आपको उत्तराखण्ड की अदभुत लोक संस्कृती से अवगत करायेगा। ये लेख बाबा काल भैरव जी की उत्तराखण्ड मे अत्यनत मान्यता और उनके अदभुत चमत्कार का वर्णन है। जो की एक सत्य घटना पर आधारित है परंतु कुछ कारणों से व्यक्ति विशेष और स्थान के नाम बदल दिये गये है। ये घटना उत्तराखण्ड के बागेश्वर जिले की ही है परंतु गॉव का नाम बदल दियागया है। उमीद है आप लोगो को ये लेख पसंद आयेगा। धन्यवाद …. जय बाबा काल भैरवा ।


Page Number - 4

शुखिया और हरूली वहा पहुचते है तो भैस का बच्चा उन्हें देखके चिल्लाने लगता है। शुखिया और हरूली समझ जाते है की बच्चे को भूक लगयी है। हरूली जल्दी से जा के बच्चे को खोल देती है जिससे वो खुद भैस के पास जके दूध पिसके। पर भैस उसे पास ही नही आने देती है। बच्चे के बार बार प्रयास करने पर भी उसे लात मारके दूध पिने नहीं देती है। और गुस्से मे उसे माने भी भी जाती है। यह देख के शुख्यिा कहता है तुम बच्चे को बान्ध दो आज मै दूघ दूता है । हरूली जल्दी से भैस के बच्चे के बान्ध देती है।

जैसे ही शुखिया बर्तन ले के दूध दूने को बैठता है। भैस उसे जोर दार सिंगह मारने की कोशिश करती है। पर शुखिया बच जाता है।

हरूली - तुम रहने दो मै ही दू के देखती हू तुम को चोट लग जाये गी। रोज की आदत जों नहीं है तुम को दूध दूने की। शुखिया भी बर्तन हरूली को दे देता है। और आगे आके भैस को डराने की कोशिश करता है। दोनो ही भैस के अचानक बदले हुए व्यवहार से आश्चर्य चकित थे।

हरूली भी भैस को इतने गुस्से मे देख के थोड़ी डरी हूई सी थी पर उसने हिम्मत करके फिर से कोशिश की। पर इस बार भी भैस ने उसे पास नहीं आने दिया। उनकी समझ मे कुछ नहीं आ नहीं आ रहा था। तभी बाहर कुछ जोर से गिरने की आवज हुइ। दोनो बाहर आ के देखते है। तो कुछ भी नहीं मिलता है।

वो फिर से अंदर जाने को होते है तो ग्वाड़ का दरवाजा अपने आप जोर से बंद होजाता है। उन दोनो को लगता है हवा से बंद हो गया होगा। वो दोनो अन्दर जाने के लिए दरवाजा खोलने की कोशिश करते है पर दरवाजा नहीं खुल्ता है। दोनो थक के थेड़ी देर रुक जाते है।

तब तक बहुत अंधेरा भी हो चुका था। उन्हें घर भी जाना था। चारो और सन्नाटा छा जाता है। तभी दरवाजा अपने आप तेजी से खुल जाता है। ये देख के शुखिया और हरूली दोनो डर जाते है। पर फिर भी हिम्मत करके अंदर जाने को तैयार होते है। तभि अंदर से आवज आती है “ चले जाओ यहा से “ और दरवाजा फिर जोर से बंद होता है। अब तो शुखिया और हरूली दोनो सीधे घर को चल देते है। दोनो डर की वजह से कुछ भी नहीं बोलते है और भाग के सीधे घर आ जाते है। घर आ के शुखिया कहता है। देखो रात का समय है अभी खाना बनाओ और खाके सो जाते है सुबहा ही कुछ सोचते है। बच्चो को नही बताना ये सब वो डरेगें वरना।

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एक कथा बाबा काल भैरव जी की……
 

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