एक कथा बाबा काल भैरव जी की……


Writer:- सुन्दर लाल जी… Total page:-   11
Type:- लेख Page no.:- 5
Date:- 6/4/2015 1    
Description:- देव भूमी उत्तराखण्ड पर ये पहला लेख है जो की आपको उत्तराखण्ड की अदभुत लोक संस्कृती से अवगत करायेगा। ये लेख बाबा काल भैरव जी की उत्तराखण्ड मे अत्यनत मान्यता और उनके अदभुत चमत्कार का वर्णन है। जो की एक सत्य घटना पर आधारित है परंतु कुछ कारणों से व्यक्ति विशेष और स्थान के नाम बदल दिये गये है। ये घटना उत्तराखण्ड के बागेश्वर जिले की ही है परंतु गॉव का नाम बदल दियागया है। उमीद है आप लोगो को ये लेख पसंद आयेगा। धन्यवाद …. जय बाबा काल भैरवा ।


Page Number - 5

तब तक बहुत अंधेरा भी हो चुका था। उन्हें घर भी जाना था। चारो और सन्नाटा छा जाता है। तभी दरवाजा अपने आप तेजी से खुल जाता है। ये देख के शुखिया और हरूली दोनो डर जाते है। पर फिर भी हिम्मत करके अंदर जाने को तैयार होते है। तभि अंदर से आवज आती है “ चले जाओ यहा से “ और दरवाजा फिर जोर से बंद होता है। अब तो शुखिया और हरूली दोनो सीधे घर को चल देते है। दोनो डर की वजह से कुछ भी नहीं बोलते है और भाग के सीधे घर आ जाते है। घर आ के शुखिया कहता है। देखो रात का समय है अभी खाना बनाओ और खाके सो जाते है सुबहा ही कुछ सोचते है। बच्चो को नही बताना ये सब वो डरेगें वरना।

शुखिया और हरूली चुप-चाप रात का खाना खा के सो जाते है दिन भर के काम से थके हूए जो थे दोनो। इतना डरे होने के बाद भी वो नींद मे खो गये सायद ये सोच के की कल सुबहा उनके लिए नया दिन लाये और आज का दिन एक बुरा सपने की तरह गुजर जाय। पर शायद सुबहा उनकी उठने का इंतजार कर रही थी।

सुबह हरूली रोज की तरह सबसे पहले उठी । उसे सूबह घर का काम जल्दि खत्म कर के खेत पे जो जाना होता था। पर जैसे हरूली रसाई मे गयी उसकी ऑखे खुली की खुली रह गयी । उसे कुछ समझ नहीं आया तो वो जोर से चिल्लायी “ सुनते हो, जरा जल्दि तो आना यहॉ ” हरूली की आवज सुन के शुखिया नींद से जागता है। और दौड़ के रसोई की ओर भागता है। वो भी रासाई की हालत देख के सोच मे पड़ जाता है।

रसोई का सारा समान जमीन पर पड़ा होता है। सारे बर्तन और खाने का समान सब जमीन मे फैला देख के दोनो एक दूसरे को देखते है और पुछते है ये सब कैसे हुआ। और हूआ तो हमे पता कैसे नहीं चला। रसोई उनके कमरे से दूर भी तो नही है। और अगर कोई चोर आया होता तो। कुछ ले के भी जाता सब इस तरह से फैला के बरबाद करके तो नहीं जाता। तभी उनके बच्चे भी आ जाते है। वो पूछते है की ये सब कैसे हो गया। तो हरूली कह देती है शायद रात को बिल्ली बन्द हो गयी थी रसोई में। वरना बच्चे डर जाते तो उन्हें सम्भालना मुशकिल होजाता।

शुखिया ने हरूली को देखते हुए कहता है कुछ गड़ढड़ जरूर है। हमे कुछ करना पड़ेगा। पता नहीं भगवान हमें किस गलती की सजा दे रहे है ।

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एक कथा बाबा काल भैरव जी की……
 

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