राजूला – मालूशाही की अमर प्रेम कथा


Writer:- सुन्दर जी Total page:-   12
Type:- प्रेम कहानी Page no.:- 6
Date:- 7/7/2016 1    
Description:- राजूला मालूशाही उत्तराखण्ड की प्रशिद्ध प्राचीन प्रेम कथा है। जिसे उत्तराखण्ड की कुमाँउनी और गढ़वाली भाषा के लोक गीतो में गाया जाता है। उत्तराखण्ड के प्राचीन इतिहास को अपने में संजोय, ये कथा उत्तराखण्ड का हृदय है। यह कथा उत्तराखण्ड के बैराठ राज्य के कत्यूरी राज वंश के राजा मालूशाही और भोट राज्य के धनी व्यापारी सुनपती शौक्य की पुत्री राजूला शौक की अमर प्रेम कथा है। जिसे युगों युगों तक याद किया जायगा। किस तरहा से एक स्त्री ने अपना पती व्रता धर्म निभाया। और कैसे एक राजा ने अपने प्रेम के लिए राज्य पाठ त्याग के योगी बन जंगल जंगल विचिरण किया। आप सभी का स्वागत है इस रोचक प्रेम कथा में।


Page Number - 6

यूहीं दिन गुजरते रहे। और वर्षा ऋतु आयी और आ के चली गयी। राजूला मालूशाही का इंतजार करती रही। इधर मालूशाही की माँ का स्वास्थ ठिक न होने के कारण मालूशाही अपनी माता के उपचार में व्यस्थ रहने लगा। उधर राजूला जल्दी से शीत ऋतु के आने का इंतजार कर रही थी।

एक दिन भोट राज्य में एक उत्सव हुआ। जिसमे भोट राज्य के सभी लोग जा रहे थे। यह सुन कर सुनपति शौक ने भी अपनी पूत्री राजूला से कहा चलो हम लोग भी इस उत्सव में कुछ व्यापार कर लेंगें। सुना है दूर दूर से राजा इस उत्सव में आ रहे है। पहले तो राजूला का मन किसी उत्सव में जाने का नहीं था परंतु यह सोच के की शायद राजा मालूशाही भी इस उत्सव में आ रहे हो। यह सोच कर वो भी अपने पिता के साथ उत्सव में आने को तैयार हो जाती है।

उत्सव में राजूला की आँखे हर जगह मालूशाही को ही ढूंढ रही थी। परंतू राजा मालूशाही अपनी माँ की सेवा से व्यस्थ थे। उत्सव में राजा मालूशाही तो नहीं पहुचे परंतु भोट राज्य के राजा की नजर राजूला पर पड़ी और राजूला की सुंदरता को देख के वो मंत्र मुग्द हो गये उन्होने अपने सेवकों से कहा जा कर पता करों इतनी सुंदर स्त्री इस भोट राज्य में कहा से आयी।

सेवको ने राजा के बताया ये तो अपने ही राज्य के प्रशिद्ध व्यापारी सोनपती शौक की पुत्री राजूला है।
यह सुन कर राजा कहता है इतनी सुंदर स्त्री हमारे ही राज्य में थी और हमें पता ही नहीं था। अगले ही दिन भोट के राजा सुनपति शौक के घर उस की पुत्री का रिशता मांगने पहुच जाता है।

सुनपती शौक राजा का रिशता सुन के खुश हो जाते है। भोट में ही अगर उनकी पूत्री का विवाह हो गया तो वो जब चाहे अपनी पुत्री से मिलने जा सकेगें।

सुनपती शौक बिना राजूला से पूछे ही उसका विवाह भोट के राजा से अगले वर्ष करने के लिए तैय कर देते है।

परंतु जब राजूला की मां उसे बताती है तो वो बहुत उदास हो जाती है। वो मालूशाही के सिवा किसी से भी विवाह नहीं करना चाहती थी। जल्द ही शीत ऋतु का आगमन हो जाता है।

राजूला मालूशाही से मीलने जाने के लिए उपय सोचती ही। परंतु उसे कुछ समझ मे नहीं आता है। फिर वो तरकीब सोचती है। वो अपनी मां से कहती है की रात तो मेरे स्वप्न में एक बाबा आये थे और उन्होने कहा की मेरे लिए बागनाथ के मंदिर मे भेट ले के आना। उसकी मां कहती है वो बाबा बागनाथ ही आये होगें वे हमारे ईष्ट देव है। वो हमारी हर इच्छा पूरी करते है। तुम्हारे विवाह के पश्चात तुम्हारे पिता के साथ हम सब जा के बागनाथ जी को भेंट चढांयेगें।

यह सुनकर राजूला कहती है पर बाबा तो अभी आये है तब तक रूकना सही नहीं होगा। इस पर उसकी मां कहती है अभी तो तुम्हारे पिता जी के पास समय नहीं है। तो राजूला कहती है मै चली जाती हू उनके स्वप्न में थोड़े आये है बाबा बागनाथ जी।

पूत्री का बात सुन कर मां गाउली मुस्कराती है और कहती है कि परंतु बागनाथ जी का मंदिर बहुत दूर है वहा अकेले जाना उचित नहीं होगा। इस लिए अपने पिता के वापस आने तक इंतजार करों।

राजूला को पता था ऐसे तो उसके माता पिता उसे नही जाने देगें। इसलिए उसने अपने पिता के व्यपार से वापस आने पर एक दिन जोर से पेट दर्द का बहाना बनाया। और अपने माता से कहने लगी मझे बागनाथ के दर्शन को जाना ही होगा। अन्यथा मेरा स्वास्थय सही नहीं होगा।

अपनी पुत्री की ऐसी दशा देख कर सुनपति शौक और उसकी पत्नी दोनो चिन्तित हो गये। और अपनी पुत्री से कहा पुत्री हम जल्द ही चलेगें बाबा बागनाथ के दर्शन के लिए। परंतु राजूला तो अकेले जाना चाहती थी, वो जानती थी उसके माता पिता उसे अकेले तो बागनाथ जी के दर्शन को नहीं जाने देंगे।

इसलिए एक दिन राजूला बिना बताये अपने घर से बागनाथ जी के दर्शन को निकल गयी। जाते समय अपनी एक शखी को कह दिया की माता पिता को समझा देना की वो बागनाथ के दर्शन को गयी है और उसकी चिन्ता न करें मैं शीघ्र घर वापस आ जाऊँगी।

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राजूला – मालूशाही की अमर प्रेम कथा
 

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