चमत्कारी ग्वेलज्यू महाराज जी


Writer:- सुन्दर लाल जी Total page:-   9
Type:- सामान्य कहानी Page no.:- 6
Date:- 12/25/2014    
Description:- ग्वेलज्यू (गोलू) महाराज जी पूरे उत्तराखड पूजे जाने वाले देवता ही नहीं बल्कि पूरे उत्तरखडं में न्याय दिलाने वाले देवता के नाम से भी जाने जाते है। गोलू जी जितने खुद चमत्तकारी थे। उतनी ही चमत्तकारी उनकी कथा भी है। सभी को उन का आर्शिवाद प्राप्त हो।


Page Number - 6

राजा और रानी बालक के जन्म ना होने से शोक मनाने लगे। और अपनी किस्मत समझ कर अपना राज काज चलाने लगे। जल्द ही सबकुछ सामान्य हो गया। पर शायद राज्य की खुशिया कही खो सी गयी थी।

सात दिन और सात रात तक नदी में बहते हुए वो लोहे का संदूक आठवे दिन गौरीहाट पहुचा। जहा सुबह सुबह एक मछुवारे के जाल में लोहे का संदूक फस गया। मछुवारा बहुत खुश हुआ की आज तो बहुत बड़ी मछली फस गयी है जाल में । पर जब मछुवारे ने संदूक खोल के देखा तो उसके आश्चर्य का कोई ठिकाना ना रहा। पानी में डूबे बक्से से किसी जीवित बालक का मिलना किसी चमतकार से कम नहीं हैं। वो समझ गया ये जरूर ये कोई चमतकारी बालक हैं। मछुवारे की भी कोई संतान नही थी ।

मछुवारा और उस की पत्नी इस अवतारी बालक की प्यारी मुस्कान के आगे अपने सारे दुख भुल गये। इसलिए वो उस बालक को भगवान का आशिर्वाद मान के उसके लालन पालन में लग गये। जब बालक थोड़े बड़े हुए तो वो गाय चरानें जाया करने लगे। पूरे गॉव के गाय ले के वो दिन भर गायों की सेवा करते । ग्वाले जाने के कारण ही उन्हें ग्वेलज्यू के नाम से जाना गया। जब वे बालावस्था से थोड़े बड़े हुए तो उन्हें अपने जन्म की थोड़ी थोड़ी धटना स्वपन में दिखाई देने लगी। जिससे उन्हें धूमने और सैर करने की इच्छा हुई।

गोलू जी ने अपने मछुवारे पिता से धोड़ा दिलाने की जिद्द करने लगे। मछुवारे के पास इतना धन ना था की वे धोड़ा खरीद सके । पर गोलू जी की जिद्द के आगे उनकी कहा चलने वाली थी। तो निर्धन मछुवारे ने एक लकड़ी का धोड़ा बनवा के गोलू जी को दे दिया। पर गोलू जी ने अपने चमत्कार से काठ के धोड़े को ही जीवत कर दिया और दूर दूर तक धूमना शुरू कर दिया।

एक दिन गोलू जी के सपने में उनकी माता कालिगां आयी । वो कह रही थी में तेरी माता हू। पुत्र आ जा मेरे पास। इस सपने के बाद से ही वो बहूत परेशान रहने लगे। और एक दिन उन्हों ने अपने जन्म की सारी धटना सपने मे देखी। इसके बाद गोलू जी अपने सपने की सारी बात अपने पालक पिता से कही। तो मछुवारे ने भी गोलू जी के नदी से मिलने की बात उन्हें बता दी इतना सब जान के गोलू जी अपने माता पिता की खोज में निकल गये।

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चमत्कारी ग्वेलज्यू महाराज जी
 

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