चमत्कारी ग्वेलज्यू महाराज जी


Writer:- सुन्दर लाल जी Total page:-   9
Type:- सामान्य कहानी Page no.:- 7
Date:- 12/25/2014    
Description:- ग्वेलज्यू (गोलू) महाराज जी पूरे उत्तराखड पूजे जाने वाले देवता ही नहीं बल्कि पूरे उत्तरखडं में न्याय दिलाने वाले देवता के नाम से भी जाने जाते है। गोलू जी जितने खुद चमत्तकारी थे। उतनी ही चमत्तकारी उनकी कथा भी है। सभी को उन का आर्शिवाद प्राप्त हो।


Page Number - 7

एक दिन गोलू जी के सपने में उनकी माता कालिगां आयी । वो कह रही थी में तेरी माता हू। पुत्र आ जा मेरे पास। इस सपने के बाद से ही वो बहूत परेशान रहने लगे। और एक दिन उन्हों ने अपने जन्म की सारी धटना सपने मे देखी। इसके बाद गोलू जी अपने सपने की सारी बात अपने पालक पिता से कही। तो मछुवारे ने भी गोलू जी के नदी से मिलने की बात उन्हें बता दी इतना सब जान के गोलू जी अपने माता पिता की खोज में निकल गये।

गोलू जी लम्बी यात्रा से थक के एक नदी के पास पानी पीने के लिए रूके । पर उन्हों ने देखा की थोड़ी आगे नदी के पास राजा के सिपाही दिखे। गोलू जी जब पास गये तो उन्हें अपने सपने में दिखाई दी कालिगां माता दिखी । वो अपनी सात सौतो के साथ नदी पे स्नान के लिए आई हुई थी । जब गोलू जी ने उन दुष्ट सातो रानी को वहा देखा तो उन्हें अपने स्वपन पे पूरा विशवाश हो गया। गोलू जी ने अपने काठ के धोड़े को उठाया और सभी रानीयो से कहा ।

आप सभी थोड़ी देर नदी से हट जाये और उनके धोड़े को पानी पीने दे। गोलू जी ने कहा मेरा धोड़ा शोर में पानी नहीं पी सकता तो कृप्या कर के आप लोग थोड़ा विषराम कर ले। और मेरे धोड़े को जल धरहण करने दे। ये सुन कर सातो रानीयों को गुस्सा आ गया। उन्हों ने कहा हे मुर्ख बालक शायद तूम्हे पता नहीं हम यहा के राजा झालूरायी की रानियां हॅ तुमहे इस चेष्टा के लिए दण्ड भी मिल सकता है।

गोलू जी नहीं माने और उनहें नदी से हटने को कहने लगे। तब रानी कालिगां ने कहा। बालक हट मत करो । कभी लकड़ी का धोड़ा भी पानी पीता है। ये सुन कर सातो रानीयॉ गोलू जी का हाश्य करने लगी। और गोलू जी की मूर्खता पूर्ण बात पर उनकी निंदा करने लगी। तब गोलू जी ने विनम्रता से कहा हे माता कालिंगा जब कोई स्त्री अपने गर्भ से पथर के सिल्बट्टा को जन्म दे सकती है तो ये काठ का धोड़ा भी पानी पी सकता है।

रानी कालिंगा ये बात सुनके सोच में पडं गयी । और सातो रानीयों को अपने दवार किये गये षडयंत्र को याद दिला ने पर। सातो रानी उस पे क्रोधित हुई और अपने सैनिको से बालक को पकड़ लेने का कहा। जब गोलू जी को राजा झालूराई जी के सामने लाया गया। तो राजा से इसे सजा दिलाने के लिए सातो रानीयों ने राजा को अपने हूए अपमान की झूटी बात कहने लगी।

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चमत्कारी ग्वेलज्यू महाराज जी
 

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