राजूला – मालूशाही की अमर प्रेम कथा


Writer:- सुन्दर जी Total page:-   12
Type:- प्रेम कहानी Page no.:- 8
Date:- 7/7/2016 1    
Description:- राजूला मालूशाही उत्तराखण्ड की प्रशिद्ध प्राचीन प्रेम कथा है। जिसे उत्तराखण्ड की कुमाँउनी और गढ़वाली भाषा के लोक गीतो में गाया जाता है। उत्तराखण्ड के प्राचीन इतिहास को अपने में संजोय, ये कथा उत्तराखण्ड का हृदय है। यह कथा उत्तराखण्ड के बैराठ राज्य के कत्यूरी राज वंश के राजा मालूशाही और भोट राज्य के धनी व्यापारी सुनपती शौक्य की पुत्री राजूला शौक की अमर प्रेम कथा है। जिसे युगों युगों तक याद किया जायगा। किस तरहा से एक स्त्री ने अपना पती व्रता धर्म निभाया। और कैसे एक राजा ने अपने प्रेम के लिए राज्य पाठ त्याग के योगी बन जंगल जंगल विचिरण किया। आप सभी का स्वागत है इस रोचक प्रेम कथा में।


Page Number - 8

जब बहुत ढूंढने के बाद भी मालूशाही नही मिलता है तो राजूला थक-हार कर बागनाथ जी के पास जाती है। उनसे कहती है। है बागनाथ ज्यू तुम तो सब जानने वाले हो। मै मालूशाही के लिए इतनी दूर से आयी हू पर मालूशाही कही नही मिला मुझे। यह कह कर राजूला खूब रोती है।

हाथ जोड़ी अर्ज कनु धरि बटि ध्यान।
दयाल है जाओ तुम इशवरा भगवाना।।

बहुत देर तक रोने के बाद राजूला को गुस्सा आता है। राजूला कहती है। हे बागनाथ जी अगर आप में शक्ति होती तो में जरूर मालूशाही से आज मिल पाती । मैं इतनी दूर से तुम्हारे पास आयी और तुम मेरी इतनी सी इच्छा पूरी नहीं कर पाये। तुम में कोई शक्ति नहीं है। पागल है वो लोग जो इतनी दूर से यहा भीड़ लगाने आते है। राजूला गुस्से मे बागनाथ जी का अपमान कर देती है। अपनी इच्छा पूरी ना होते देख वह निश्चय करती है कि वह बैराठ राज्य जा के ही मालूशाही से मिलेगी।

मन्दिरा बै भ्यरा आई बट्टा लगि गेछा।
बागेश्वरा गरूड़ बै कौस्याणी आ गेछा।।

राजूला ने कई शहरो की यात्रा की जहा उसे बहुत से कष्टो का सामना भी करना पड़ा। जंगल से जाते समय एक शक्तिशाली ग्वाले की नजर अकेली राजूला पर पड़ी। राजूला के उज्याली सूरत और मोहनी चाल पर वो मोहित हो गया। राजूला को रोक कर उसके इस तरह से जंगल मे भटक ने का कारण पूछने लगा। राजूला ने अपना पूरा हाल बताया। ग्वाला कहने लगा हे सुन्दरी वो तो राजा है वो क्यु तुम्हें अपनी रानी बनायेगा। तुम मेरे साथ चलो में तुम्हे अपनी रानी बना के रखुगां।

हिट म्यारा घर सुवा, मेरी राणी हली।
और कमा मैं करूला, तू रोटी पकाली।।

राजूला ने कहा। नहीं में तो सिर्फ मालूशाही की हू मुझे बस बैराठ राज्य का रास्ता बता दो। परंतु वो ग्वाला इतनी सुंदर स्त्री को हाथ से जाने नहीं देना चाहता है। वो कहता है – हे स्त्री प्यार से मान जा वरना में बल को प्रयोग भी कर सकता हू। मुझे से बलशाली तो तूझे कोई राजा भी नहीं मिलेगा।

राजूला कहती है मेरे मालूशाही तुझसे बहुत बालशाली है। तूझे तो मैं ही हरा दूगीं , तु मुझे कमजोर मत समझ और मेरे रास्ते से हट जा। पर ग्वाला नहीं मानता है और राजूला को पकड़ के अपने साथ ले जाने लगता है। तब राजूला भोट राज्य में होने वाला शक्तिशाली विष को उस ग्वाले पर फेंक देती है।

जिस के कारण वो ग्वाला वही ढेर हो जाता है। राजूला उचित समय देख कर वह से निकल जाती है। इस तरह कई बार राजूला ने अपनी जान बचाई। राजूला सुन्दर होने के साथ साथ अपने सम्मान की रक्षा करने में सक्ष्म थी। बहुत सी परेशानीयों का सामना करते हुए अखिरकार वो बैराठ नरेश के राज्य में पहुच जाती है।

राजूला सीधे राज दरबार में चली जाती है और राजा मालूशाही से मिलने का प्रयास करने लगती है। परंतु राजा के सेवक उसे मालूशाही से मिलने नहीं देते है। राजूला अब अधिक समय नष्ट नही करना चाहती थी। इसलिए वह अपने विष से सभी को मूर्छित करती हुई राज महल में परवेश कर जाती है। उस समय मालूशाही चिर निद्रा मे सोए हुए थे।

राजूला मालूशाही को सोया देख कर थोड़ा शान्त होती है और सोचती है अब वो मालूशाही को अपने दिल का हाल सुना पायेगी। परंतु राजूला द्वारा किये विष का प्रभाव राजा मालूशाही पर भी हो जाता है। जिस कारण राजूला मालूशाही को बहुत उठाने का प्रयास करती है। परंतु मालूशाही तो मूर्छित पड़े रहते है। राजूला बहुत रोती है, इतने पास आ कर भी मालूशाही से न मिल पाने का शोक से आहत होती है। थक हार कर राजूला एक पत्र लिखती है। और उसे राजा के सिरहने पर छोड़ कर अपने घर वापस चली आती है।

जब मालूशाही से विष का असर उतरता है। तो मालूशाही को राजूला का पत्र मिलता है। मालूशाही पत्र पढ़ता है – प्रिय मालूशाही तूम तो अपनी राजूला को भूल ही गये। मैं तुम से मिलने इतनी दूर आयी और तुम तो अपनी निद्रा मे ही खोये हुऐ थे। तुम्हे इतना उठाने के प्रयास के बाद भी जब नहीं उठे तो मैं ये पत्र लिख रही हू। मैं ये सूचना देने आयी हू की मेरे माता पिता ने मेरा विवाह भोट राज्य के राजा से मेरा विवाह तय कर दिया है। अगर तुमने अपनी माता का दूध पिया है तो मुझे भोट राज्य लेने आना। मुझे तुम्हारा इंतजार रहेगा। तुम्हारी राजूला शौक्याणी।


राजूला का पत्र पढ़ कर मालूशाही को बहूत दूखः हुआ। राजूला इतनी दूर उससे मिलने आ गयी और वो सोता ही रह गया। मालूशाही तुरंत अपनी माता के पास आज्ञा लेने जाता है। मालूशाही तुरंत पूरी सेना के साथ भोट पर आक्रमण कर राजूला को अपने राज्य ले कर आने की रण नीती बनाता है। परंतु मालूशाही की माँ रानी धर्मा देवी कहती है। पुत्र तू जानता नहीं है। भोट राज्य अपने जहरीले बिष के लिए प्रसिद्ध है। तेरी पूरी सेना भी भोट के बिष का सामना नहीं कर सकती।

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राजूला – मालूशाही की अमर प्रेम कथा
 

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